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90 के दशक की टॉप एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी और उनकी विवादित बी ग्रेड फिल्म ‘डिवाइन टेंपल खुजराहो’

90 के दशक की टॉप एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी और उनकी विवादित बी ग्रेड फिल्म ‘डिवाइन टेंपल खुजराहो’

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90 के दशक में बॉलीवुड में कई ऐसी अभिनेत्रियाँ रहीं जिन्होंने अपनी एक्टिंग और खूबसूरती से फिल्म इंडस्ट्री में नाम कमाया। इन्हीं में से एक हैं ममता कुलकर्णी। ममता ने अपनी मेहनत और दमदार एक्टिंग से बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई और उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुईं। लेकिन, एक वक्त ऐसा भी आया जब ममता को एक ऐसी फिल्म में काम करना पड़ा, जिसे देखकर लोग चौंक गए और फिल्म के बोल्ड सीन पर आलोचनाओं की बाढ़ आ गई। इस फिल्म का नाम था ‘डिवाइन टेंपल खुजराहो’।

ममता कुलकर्णी: एक स्टार से बी ग्रेड फिल्मों तक

ममता कुलकर्णी का फिल्मी करियर उन अभिनेत्रियों में से एक रहा जिन्होंने बहुत कम समय में फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम कमाया। उन्होंने शाहरुख खान, सलमान खान और अक्षय कुमार जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया। ममता अपनी खूबसूरती, एक्टिंग और परफेक्ट स्क्रीन प्रेजेंस की वजह से काफी लोकप्रिय हुईं। फिल्मों में अपने बोल्ड लुक और हॉट इमेज की वजह से भी वह चर्चा में रहीं।

ममता कुलकर्णी ने 90 के दशक में कई बड़ी फिल्मों में काम किया, जिनमें ‘कुली नंबर 1’, ‘करण अर्जुन’ और ‘बाजी’ जैसी फिल्में शामिल हैं। लेकिन, बॉलीवुड में कई उतार-चढ़ाव के बाद ममता का करियर अचानक ढलान पर आ गया।

ममता के करियर ने तब नया मोड़ लिया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़ी कुछ परेशानियों के चलते उन्होंने बी ग्रेड फिल्मों की ओर रुख किया। इस बदलाव ने उनकी छवि को भी काफी प्रभावित किया। हालांकि, यह कदम उनकी मजबूरी में उठाया गया था, क्योंकि उस समय वह फिल्म इंडस्ट्री में अपना नाम बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं।

फिल्म ‘दिव्य मंदिर खजुराहो’ का विवाद

ममता कुलकर्णी की सबसे विवादित फिल्म ‘दिव्य मंदिर खजुराहो’ थी। यह फिल्म भारतीय संस्कृति, खासकर खजुराहो मंदिर की वास्तुकला और उसकी कामुक मूर्तियों पर आधारित थी। खजुराहो मंदिर विश्व प्रसिद्ध है, जो अपनी अनूठी नागर शैली की वास्तुकला और शानदार मूर्तियों के लिए जाना जाता है। इन मूर्तियों और उनके कामुक रूप को भारतीय कला का अभिन्न अंग माना जाता है, लेकिन फिल्म निर्माताओं ने इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को शॉर्टकट के तौर पर इस्तेमाल किया। फिल्म के निर्माण में खजुराहो के मंदिर और उसकी कला को बेहद अश्लील और विवादित तरीके से पेश किया गया।

फिल्म में ममता कुलकर्णी के साथ एक और अभिनेत्री मिंक और साधिका भी थीं। फिल्म का निर्देशन अशोक कुमार ने किया था और इसे पूरी तरह से बी ग्रेड फिल्म के तौर पर पेश किया गया। फिल्म का मुख्य उद्देश्य सिर्फ एक ही था- बोल्ड सीन और उत्तेजक सीन। फिल्म में हर मोड़ पर अश्लील और अश्लील कंटेंट था, जो दर्शकों के लिए काफी असहज था। इस वजह से फिल्म को शुरू से लेकर आखिर तक कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

फिल्म की असफलता और आलोचनाएं

‘दिव्य मंदिर खजुराहो’ की सबसे बड़ी आलोचना इसके बेतुके और बेहद बोल्ड सीन थे। दर्शकों और आलोचकों ने फिल्म की काफी आलोचना की और इसे मेगा-क्रैप फिल्म करार दिया। जिस तरह से फिल्म में खजुराहो मंदिर और उसकी वास्तुकला को नग्नता और कामुकता के मिश्रण से पेश किया गया, उससे न सिर्फ फिल्म की विषय-वस्तु का अपमान हुआ, बल्कि भारतीय संस्कृति और कला का भी अपमान हुआ।

इस फिल्म के सफल होने की उम्मीद कोई नहीं कर सकता था, क्योंकि यह सेंसर बोर्ड की गाइडलाइन का पूरी तरह से उल्लंघन कर रही थी। साथ ही फिल्म की अश्लीलता और खराब स्क्रिप्ट ने इसे एक बड़ी फ्लॉप फिल्म साबित कर दिया। दर्शकों ने फिल्म को नकारात्मक नजरिए से देखा और इसे पूरी तरह से असफल प्रोजेक्ट माना।

ममता कुलकर्णी का करियर और उनकी मौजूदा स्थिति

यह फिल्म ममता कुलकर्णी के लिए एक ऐसा टर्निंग प्वाइंट साबित हुई, जिससे बाहर निकलना आसान नहीं था। इस फिल्म के बाद ममता का फिल्मी करियर लगभग खत्म हो गया। हालांकि, उन्होंने इस दौरान कई अन्य बी ग्रेड फिल्मों में भी काम किया, लेकिन वे कभी भी अपनी पुरानी प्रतिष्ठा और सम्मान हासिल नहीं कर पाईं।

ममता कुलकर्णी का सफर इस बात की सीख देने वाली कहानी है कि कैसे फिल्म इंडस्ट्री में एक स्टार का करियर चमत्कारिक ढंग से ऊपर चढ़ता है और फिर एक गलत फैसले के कारण नीचे गिर जाता है। इस फिल्म ने न केवल ममता के करियर को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उस समय बी ग्रेड फिल्मों और उनके कंटेंट को लेकर बॉलीवुड की आलोचना भी हुई।

आज ममता कुलकर्णी फिल्मों से दूर हैं और उनकी निजी जिंदगी भी विवादों से घिरी हुई है। उन्होंने अपने जीवन के कुछ साल पूरी तरह गुमनामी में बिताए और अब वे मीडिया में बहुत कम ही दिखाई देती हैं। हालांकि, बी ग्रेड फिल्मों के उनके दौर ने उन्हें बॉलीवुड की एक विवादित लेकिन यादगार शख्सियत बना दिया है।

निष्कर्ष

ममता कुलकर्णी का फिल्मी करियर एक दिलचस्प और संघर्षपूर्ण सफर रहा है। उनके द्वारा की गई ‘डिवाइन टेंपल खुजराहो’ जैसी फिल्में बॉलीवुड की बी ग्रेड फिल्म इंडस्ट्री की याद दिलाती हैं। इस फिल्म ने जहां ममता के करियर को नकारात्मक मोड़ दिया, वहीं उस समय भारतीय सिनेमा की फिल्ममेकिंग और कंटेंट पर भी कई सवाल खड़े किए।

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Hello दोस्तो मेरा नाम अजय यादव है में पढ़ाई के साथ साथ माल्टीपाल बिज़नेस को भी रन कर रह हूं ताकी मेरी फाइनेंशियल प्रॉब्लम दूर हो सके अभी मेरी उम्र 20 है ब्लॉगिंग के साथ साथ मुझे हर तरह कि फिल्ड का एक्सपीरियंस है जिसकी सहायता से मेरा आज भी स्ट्रगल चल रहा है। शुक्रिया